Friday, March 4, 2016

Tricks :- इस ट्रिक से Google की जगह अपना नाम लिखे।



इस ट्रिक से आप google की जगह अपना नाम लिख सकते है। जैसा की आप देख सकते है स्क्रीनशॉट में मैंने अपने वेबसाइट का नाम लिखा हुवा है। मैं आपको नीचे लिंक दे रहा हु जहा पर आप अपना नाम लिखकर नीचे बहुत सारे dezine बने हुए है। जैसा आप चाहे सेलेक्ट करे सेलेक्ट करते ही आपके नाम का google होम हो जायेगा अगर आप गूगल की तरह लिखना चाहते है तो dezine के ऊपर गूगल का option चुने।
Google की जगह अपना नाम लिखने के लिए यहाँ क्लिक करे।

Job मार्गदर्शन:- पत्रकारिता एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में करियर कैसे और कहा से करे तैयारी।


       भारत में विकास तथा गवर्नेंस का क्षेत्र हाल ही में एक नया उदाहरण बना है, जिसका मुख्य आधार नई नीतिगत व्यवस्था, परिवर्तित व्यवसाय परिवेश और सार्वभौमिकरण है। इन समसामयिक स्थितियों के कारण पत्रकारिता की प्रासंगिकता व्यापक रूप से बढ़ गई है। पत्रकारिता के बढ़ रहे महत्व को देखते हुए, कई मीडिया संस्थाएं शैक्षिक संस्थाएं और इलेक्ट्रॉनिक चैनल स्थापित किए गए हैं। मीडिया समाज तथा शासन का वास्तविक दर्पण बन गया है और जन-साधारण की समस्याओं उनकी मांगो को उठाने तथा उन्हें न्याय दिलाने का एक प्रभावी साधन (प्लेट फार्म) बन गया है।

बदलते परिवेश में प्रायः प्रत्येक करियर की संभावनाओं में आमूल परिवर्तन कर दिया है। पत्रकारिता में करियर एक प्रतिष्ठित व्यवसाय है और कुछ मामलों में एक उच्च वेतन देने वाला व्यवसाय है, जो युवाओं की बडी़ संख्या को आकर्षित कर रहा है। किसी भी राष्ट्र के विकास में पत्रकारिता एक अहम भूमिका निभाती है। पत्रकारिता ही वह साधन है, जिसके माध्यम से हमें समाज की दैनिक घटनाओं के बारे में सूचना प्राप्त होती है। वास्तव में पत्रकारिता का उद्देश्य जनता को सूचना देना, समझाना, शिक्षा देना और उन्हें प्रबुद्ध करना है।

पत्रकारों के लिए अवसर अनंत है। किंतु साथ ही साथ किसी भी पत्रकार का कार्य अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि नया विश्व, इस कहावत को चरितार्थ कर रहा है कि ‘‘कलम (और कैमरा) तलवार से कहीं अधिक प्रभावशाली है।’’ अब घटनाओं की मात्र साधारण रिपोर्ट देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रिपोर्टिंग में अधिक विशेषज्ञता और व्यावसायिकता होना आवश्यक है। यही कारण है कि पत्रकार समाचारपत्रों एवं आवधिक पत्र-पत्रिकाओं के लिए राजनीति शास्त्र, वित्त एवं अर्थशास्त्र, जाचं, संस्कृति एवं खेल जैसे विविध क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करते हैं।

एक करियर के रूप में तीन ऐसे मुख्य क्षेत्र हैं जिनमें पत्रकारिता के इच्छुक व्यक्ति रोजगार ढूंढ़ सकते हैं:
• अनुसंधान एवं अध्यापन
• प्रिंट पत्रकारिता
• इलेक्ट्रॉनिक (श्रव्य/दृश्य) पत्रकारिता

अनुसंधान एवं अध्यापन: यद्यपि उच्च शिक्षा, पत्रकारों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, किंतु अनुसंधान भी पत्रकारिता में एक सामान्य करियर विकल्प है। पत्रकारिता में पी.एच.डी. प्राप्त व्यक्ति कॉलेजों विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थाओं में रोजगार तलाशते हैं। कई अध्यापन पदों पर विशेष रूप से विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अनुसंधान कार्यकलाप अपेक्षित होते हैं। शैक्षिक छापाखानों का यह आधार है ‘‘प्रकाशित करो या नष्ट हो जाओ”। अधिकांश छापाखानों की तरह इसका भी एक सत्य और विरूपण है। यद्यपि यह निश्चित तौर पर सत्य है कि पुस्तकों अथवा लेखों को प्रकाशित करना कार्य - सुरक्षा तथा पदोन्नति का मुख्य मार्ग है और अधिकांश विश्वविद्यालयों में वेतन वृद्धि होती है, यह अपेक्षा ऐसी स्थापनाओं में अधिक लागू होती है जहां मूल छात्रवृत्ति को महत्व तथा समर्थन दिया जाता है। तथापि कई संस्थाएं उन्नति के एक प्रारंभिक मार्ग के रूप में अनुसंधान अथवा अध्यापन पर अधिक बल देती है। कुछ संस्थाएं एक पर दूसरे को महत्व देती हैं तो कई संस्थाओं का प्रयास अनुसंधान तथा अध्यापन के बीच अधिकतम संतुलन बनाए रखना रहा है।

इसके परिणामस्वरूप यद्यपि कुछ व्यवसायों में पत्रकारिता में कोई डिग्री विशेष रूप से अपेक्षित होती है, तथापि, ऐसा शैक्षिक प्रशिक्षण विविध प्रकार के व्यवसायों में जाने की एक महत्वपूर्ण योग्यता हो सकती है। पत्रकारिता में कला-स्नातक या मास्टर ऑफ आर्टस अथवा अनुसंधान (पीएच.डी.) डिग्रियों के लिए, गैर-लाभ भोगी क्षेत्र में, कोई विश्वविद्यालय, कोई संस्थान कोई व्यावसायिक या मीडिया फर्म रोजगार का क्षेत्र हो सकती है। कुछ ऐसे डिग्रीधारी स्व-रोजगार वाले होते हैं और अपनी निजी अनुसंधान अथवा परामर्श-फर्मों के प्रमुख होते हैं। तथापि, इस तथ्य पर बल दिया जाना चाहिए कि उनकी पद्धतियों तथा परिप्रेक्ष्यों को उपयोगिता देते हुए पत्रकारों ने उनके विकास में सहायता की है और वे ऐसे कई क्षेत्रों तथा करियर के पदों पर फैले हो जहां अनुसंधान का न केवल उपयोग किया जाता हो, बल्कि अनुसंधान कार्यों से भी कहीं आगे जाते हों।

प्रिंट पत्रकारिता: प्रिंट पत्रकारिता समाचार पत्रों पत्रिकाओं तथा दैनिक पत्रों के लिए समाचारों को एकत्र करने एवं उनके सम्पादन से संबद्ध हैं। समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं, वे बड़ी हों या छोटी, हमेशा विश्वभर में समाचारों तथा सूचना का मुख्य स्रोत रही हैं और लाखों व्यक्ति उन्हें प्रतिदिन पढ़ते हैं। कई वर्षों से प्रिंट पत्रकारिता बडे़ परिवर्तन की साक्षी रही है। आज समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएं विविध विशेषज्ञतापूर्ण वर्गों जैसे राजनीतिक घटनाओं व्यवसाय समाचारों, सिनेमा, खेल, स्वास्थ्य तथा कई अन्य विषयों पर समाचार प्रकाशित करते हैं, जिनके लिए व्यावसायिक रूप से योग्य पत्रकारों की मांग होती है। प्रिंट पत्रकारिता में कोई भी व्यक्ति सम्पादक, संवाददाता, रिपोर्टर, आदि के रूप में कार्य कर सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता: इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का विशेष रूप से प्रसारण के माध्यम से जन-समुदाय पर पर्याप्त प्रभाव है। दूरदर्शन, रेडियो, श्रव्य, दृश्य (ऑडियो, वीडियो) और वेब जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने दूर -दराज के स्थानों में समाचार, मनोरंजन एवं सूचनाएं पहुंचाने का कार्य किया है। वेब में, कुशल व्यक्तियों को वेब समाचार पत्रों (जो केवल वेब की पूर्ति करते हैं और इनमें प्रिंट संस्करण नहीं होते और लोक प्रिय समाचारपत्रों तथा पत्रिकाओं को जिनके अपने वेब संस्करण होते हैं, साइट रखनी होती है। इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता में कोई भी व्यक्ति रिपोर्टर, लेखक, सम्पादक, अनुसंधानकर्ता, संवाददाता और एंकर बन सकता है।
व्यक्तिगत गुण/कौशल:

पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सफल करियर के रूप में किसी भी व्यक्ति को जिज्ञासु दृढ़ इच्छा शक्ति वाला, सूचना को वास्तविक, संक्षिप्त तथा प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने की अभिरुचि रखने वाला, किसी के विचारों को सुव्यवस्थित करने तथा उन्हें भाषा तथा लिखित-दोनों रूपों में स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करने में कुशल होना चाहिए। दबाव में कार्य करने के दौरान भी नम्र एवं शांत चित्त बने रहना एक अतिरिक्त योग्यता होती है। जीवन के सभी क्षेत्रों से व्यक्तियों का साक्षात्कार लेते समय पत्रकार को व्यावहारिक, आत्मविश्वासपूर्ण तथा सुनियोजित रहना चाहिए। उसे प्रासंगिक तथ्यों को अप्रासंगिक तथ्यों से अलग करने में सक्षम होना चाहिए। अनुसंधान तथा सूचना की व्याख्या करने के लिए विश्लेषण कुशलता होनी चाहिए।
शिक्षा:

यद्यपि स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम एवं अनुसंधान चलाने वाले कई विश्वविद्यालय तथा संस्थान हैं, उनमें कुछ निम्नलिखित हैं:-

• लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
• जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
• भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली
• मुद्रा संचार संस्थान
• सिम्बियोसिस पत्रकारिता एवं संचार संस्थान
• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
(सूचना उदाहरण मात्र है)
तैनाती:

पत्रकारिता में कोई पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद, कोई भी व्यक्ति किसी मीडिया अनुसंधान संस्थान या किसी सरकारी संगठन में एक अनुसंधान वैज्ञानिक बन सकता है। अनुसंधान कार्य के दौरान भी कोई व्यक्ति अन्य अनुदानों तथा सुविधाओं के अतिरिक्त, मासिक वृत्तिका प्राप्त कर सकता है। कोई भी व्यक्ति किसी समाचारपत्र में या इलेक्ट्रॉनिक चैनल में एक पत्रकार के रूप में कार्यग्रहण कर सकता है और अच्छा वेतन अर्जित कर सकता है।

Job मार्गदर्शन:- जूलॉजी ग्रेजुएट्स के लिए ढेरों हैं नौकरियां। कैसे और कहा से करे तैयारी।


     एक ऐसा विषय है, जो न केवल बेहतरीन कॅरिअर के अवसर उपलब्ध करवाता है, बल्कि प्रकृति से जुड़ने व उसके संरक्षण में अहम भूमिका निभाने का मौका भी देता है।
साइंस के हरेक फील्ड की अपनी कॅरिअर संभावनाएं हैं। आपको सिर्फ अपना रुझान पहचानना होगा और काम का क्षेत्र चुनना होगा। जूलॉजी भी एक ऐसा विषय है, जो बेहतरीन कॅरिअर के अवसर उपलब्ध करवाता है, साथ ही प्रकृति से जुड़ने व उसके संरक्षण में अहम भूमिका निभाने का मौका देता है। जंतुओं के अध्ययन से जुड़े इस विषय में पढ़ाई व रिसर्च के लिए अच्छा स्कोप है। पीजी स्तर पर आप बायोटेक्नोलॉजी, बायोइंफॉर्मेटिक्स, मेडिसिन, फार्मेसी, वेटरिनरी साइंस, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, इन्वारॅनमेंटल साइंस, फॉरेस्ट्री, मरीन स्टडीज, ह्यूमन जेनेटिक्स, वाइल्ड लाइफ साइंस, सेरिकल्चर टेक्नोलॉजी, फायटोमेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल फिशरीज, मरीन बायोलॉजी, ओशनोग्राफी, एनाटॉमी, एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, कोस्टल एक्वाकल्चर में से कोई एक विकल्प चुनकर बेहतर कॅरिअर की राह पकड़ सकते हैं।
कैसे करें पढ़ाई

जूलॉजी एक विस्तृत विषय है, जो प्रकृति की गोद में पलने वाले जीव जगत के सभी पहलुओं की पड़ताल करता है। यह जीव-जंतुओं के उद्भव और विकास की प्रक्रिया, उनकी संरचना, व्यवहार, क्रिया-कलापों और मानव के लाभ के लिए उनके विभिन्न उपयोगों का अध्ययन करता है। भारत की लगभग सभी यूनिवर्सिटीज जूलॉजी में बीएससी, एमएससी और रिसर्च डिग्री ऑफर करती हैं जहां प्रवेश के लिए मेरिट को आधार बनाया जाता है। वहीं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस रिसर्च एंड एजुकेशन, एनसीबीएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा देनी पड़ती है। वर्तमान में आईआईटी भी माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक ऑफर कर रहे हैं जिसके लिए 12वीं में बायोलॉजी और मैथ्स के साथ एंट्रेंस एग्जाम देना आवश्यक है।
काम के अवसर

एक मल्टीडिसिप्लीनरी विषय की वजह से जूलॉजी नौकरी के लिए कई मौके देता है। इस विषय के साथ आप इन क्षेत्रों में रोजगार हासिल कर सकते हैं।

सरकारी सेवा
जूलॉजी में स्नातक के साथ इंडियन फॉरेस्ट सर्विसेज एग्जाम दे सकते हैं जो आपको बेहतर कॅरिअर के साथ वन्य प्राणियों के संरक्षण का अवसर भी प्रदान करता है। इसके अलावा पीजी या एम.फिल के साथ जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट, देहरादून या द इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन में वैज्ञानिक पद पर काम करने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

प्राणी संरक्षण
पर्यावरण में बदलाव और मानव हस्तक्षेप के चलते पूरी दुनिया में जीव प्रजातियां तेजी से विलुप्त होती जा रही हैं जिन्हें बचाने के लिए वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फेडरेशन जैसे वैश्विक संगठनों के साथ ही केंद्र व राज्य सरकारें भी जूलॉजी विशेषज्ञों की मदद लेती हैं। प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटना या पशुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट होने की स्थिति में एनिमल रीहैबिलिटेटर्स की सेवाएं ली जाती हैं। इनका काम जानवरों की देखभाल, बीमार जंतुओं का इलाज और ठीक होने पर उन्हें दोबारा प्राकृतिक परिवेश में छोड़ना होता है।

मेडिकल
जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी या पैरासाइट बायोलॉजी जैसी शाखाओं के छात्रों के लिए मेडिकल फॉरेंसिक विभाग, टेस्टिंग लैब और मेडिकल रिसर्च में विकल्पों की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा आप मानव और पशुओं के लिए दवा निर्माण करने वाली कंपनियों के साथ जुड़कर भी अपने कॅरिअर को ऊंचाइयां दे सकते हैं।

अकादमिक क्षेत्र
जूलॉजी में ग्रेजुएशन के बाद बीएड के साथ स्कूल और कोचिंग संस्थानों में पढ़ा सकते हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढाने के लिए आपको एमएससी के साथ नेट पास करना होगा।

रिसर्च
जूलॉजी में शोध की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। देश और दुनिया की तमाम श्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज और अनुसंधान संस्थान जूलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च को महत्व दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े वैश्विक संगठनों में भी जूलॉजी के रिसर्चर्स की मांग है। साथ ही कॉस्मेटिक्स, फार्मेसी और एनिमल प्रॉडक्ट्स से जुड़ी कंपनियों में रिसर्च फेलो के तौर पर अच्छा वेतन हासिल कर सकते हैं।

एनिमल हसबैंड्री
भारत में एनिमल हसबैंड्री से जुड़े सभी क्षेत्रों में रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं। इनमें मछलीपालन, पोल्ट्री, रेशम उत्पादन और कृषि पशुओं के प्रजनन व रख-रखाव से जुड़े काम शामिल हैं।

जू कीपिंग
जीव-जंतुओं से लगाव रखने वाले जूलॉजी छात्रों के लिए जू कीपिंग एक उम्दा विकल्प है। इनका काम प्राणी संग्रहालय (जू) और एक्वेरियम का रख-रखाव और जानवरों की सही तरीके से देखभाल करना है।

वाइल्डलाइफ एजुकेटर/गाइड
ये वनों में आने वाले पर्यटकों को जानवरों के विषय में जानकारी देने का काम करते हैं।

एनिमल बिहेवियरिस्ट
एनिमल बिहेवियरिस्ट का काम जानवरों के व्यवहार का अध्ययन करना होता है। ये लोग जानवरों के साथ काम करने वाले लोगों को भी प्रशिक्षण देते हैं जिससे वे जानवरों के साथ अच्छे से घुलमिल सकें और उन्हें समझ सकें।

एजुटेनमेंट
लोगों को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए मीडिया का प्रयोग करने की इच्छा रखते हैं तो एजुटेनमेंट या एजुकेशनल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री आपके लिए श्रेष्ठ विकल्प है जहां आप डिसक्वरी और नेशनल ज्योग्राफिक जैसे चैनलों के लिए डॉक्यूमेंट्री प्रॉडक्शन, कंटेंट रिसर्च, स्क्रिप्ट राइटिंग, फिल्म मेकिंग, एक्सपर्ट सपोर्ट जैसे काम कर सकते हैं।

यहां से करें कोर्स
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, हैदराबाद
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, भुवनेश्वर
जवाहर लाल नेहरु सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरु
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली

Job मार्गदर्शन:- अर्थसाइंस में बनाएँ सुनहरा भविष्य। 12वीं पास के बाद कैसे और कहाँ से करें तैयारी। सैलरी 40 हज़ार से 50 हज़ार महीने।



अर्थसाइंस में बनाएँ सुनहरा भविष्य।

12वीं के बाद से ही इस कोर्स में दाखिला ले सकते हैं

 पृथ्वी के उद्गम, विकास और इसके अन्दर और बाहर चलने वाली हलचलों को जानना खासा रोचक है। क्या अन्य ग्रहों पर कोई जीवन है, चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और अन्य ग्रहों पर क्या संसाधन उपलब्ध है, इनमें क्या बदलाव आ रहे हैं सिकुड़ते ग्लेशियरों का महासागरों और जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ रहा है- इस तरह की तमाम बातें और अनसुलझी पहेलियों के बारे में डाटा एकत्र करने का काम भूवैज्ञानिक करते हैं। उसका विश्लेषण करते हैं और एक निष्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश करते हैं। आज जब पूरे विश्व में धरती को लेकर तरह-तरह की खबरें आ रही हैं, तो इसे समझने और उसकी तह तक जाने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की अच्छी खासी जरूरत पड़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र में कुशल वैज्ञानिक और विशेषज्ञ की माँग को ध्यान में रखते हुए अर्थसाइंस का पाँच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू किया है। मजे की बात यह कि एमएससी इन अर्थसाइंस नाम से प्रचारित इस कोर्स में प्रवेश का द्वार बारहवीं कक्षा के बाद ही खोला गया है। पाँच साल के इस कोर्स को पूरा करने के बाद उद्योग जगत में सीधे करियर अपनाने या चुनने का मौका मिलता है।
क्या है कोर्स

इस कोर्स में पहले तीन साल स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है। इसके बाद एमएससी में दाखिला मिलता है। इसमें अर्थसाइंस के विविध पहलुओं जैसे भूभौतिकी, जल विज्ञान, समुद्र विज्ञान, वातावरणीय विज्ञान, ग्रहीय विज्ञान, मौसम विज्ञान, पर्यावरणीय विज्ञान और मृदा विज्ञान को व्यापक तौर पर पढ़ने व समझने का मौका मिलता है। महाद्वीपों के खिसकने, पर्वतों के बनने, ज्वालामुखी फटने के क्या कारण हैं, वैश्विक पर्यावरण किस तरह परिवर्तित हो रहा है, पृथ्वी प्रणाली कैसे काम करती है, हमें औद्योगिक कचरे का निपटान कैसे और कहाँ करना चाहिए, भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए समाज की ऊर्जा और पानी की बढ़ती माँग को कैसे पूरा किया जा सकता है, जिस तरह विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है क्या हम उसके लिए पर्याप्त खाद्य और रेसा तैयार कर सकते हैं तथा किस प्रकार खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं- ये तमाम् चीजें अर्थ साइंस के अध्ययन क्षेत्र में हैं। भूवैज्ञानिक समस्याओं को सुलझाने और संसाधन प्रबन्धन, पर्यावरणीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा मानव कल्याण के लिए सरकारी नीतियों को तैयार करने में प्रयुक्त अनिवार्य सूचना या डाटाबेस उपलब्ध कराते हैं। पृथ्वी और इसकी मिट्टियों, महासागरों और वातावरणों की जाँच, मौसम के पूर्वानुमान, भूमि उपयोग योजनाओं का विकास आदि के काम में भी इनकी भूमिका होती है। कोर्स के दौरान खनन्, तेल व प्राकृतिक गैस, भूजल, कोयला, जियो तकनीक, जीआइएस व रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण अध्ययन, ऊर्जा जलवायु परिवर्तन जैसे कई क्षेत्रों को जानने और समझने का अवसर दिया जाता है। इनसे जुड़े क्षेत्रों में से एक को आगे चलकर स्पेशलाइजेशन चुनना होता है। यह काम एसएससी स्तर पर होता है। एसएससी में अगर चार पेपर थ्योरी के हैं। इसके अलावा कई पेपर वैकल्पिक हैं जिसमें से छात्र किसी एक विकल्प को चुनकर अपना करियर बना सकता है।

कोर्स के दौरान छात्रों को दो तरह की ट्रेनिंग भी दी जाती है। पहले स्तर पर हर साल छात्रों को फील्ड ट्रिप पर भेजा जाता है। एमएससी स्तर पर समर ट्रेनिंग और समर इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के अलावा डिजर्टेशन का काम पूरा करना होता है। यहाँ फील्ड वर्क का बहुत विकल्प है।
शाखाएँ

अर्थ साइंस की कई शाखाएँ हैं। इनमें पर्यावरण अध्ययन, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, एटमॉस्फोरिक साइंस, जियोहैजर्ड्स, डिजास्टर मैनेजमेंट, क्लाइमेट परिवर्तन, ओशनोग्राफी, रिमोट सेंसिंग, एप्लायड हाइड्रोजियोलॉजी, कार्टोग्राफी और जियोग्राफिक इंफोर्मेशन सिस्टम आदि प्रमुख हैं।
अवसर कहाँ

कोर्स के छात्र के लिए राज्य और केन्द्र सरकार में जियोलॉजिस्ट बनने के कई अवसर हैं। एसएससी पास छात्रों के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा समय-समय पर जियोलॉजिस्ट की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। सेण्ट्रल ग्राउण्ड वाटर बोर्ड भी इस कोर्स के छात्रों को काम करने का अवसर मुहैया कराता है। इसमें हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के रूप में उसी स्केल पर नियुक्ति होती है जिस स्केल पर जियोलॉजिस्ट की। इनके अलावा पीएचडी करने के बाद साइंटिस्ट पद पर भर्ती होती है। ये सभी पद ग्रेड ए स्तर के अधिकारी की है। रिसर्च संस्थाओं के अलावा आजकल निजी कम्पनियों में एक्जीक्यूटिव के रूप में भी क्लास वन पद पर इसके विशेषज्ञ रखे जा रहे हैं। ओएनजीसी, वेदान्ता, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, इएसएसआर, केर्न इण्डिया जैसी कई कम्पनियाँ हैं जहाँ इनकी माँग हैं। पीएचडी करने वालों के लिए रिसर्च एसोसिएट और अध्यापन के भी मौके हैं। इसके अलावा इनकी माँग देश में जहाँ पेयजल के लिए काम हो रहा है या फिर सीमेण्ट, माइनिंग आदि के कामों में इस कोर्स के छात्रों की माँग है।
दाखिला कैसे

इस कोर्स में आमतौर पर बारहवीं की मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जाता है। साइंस के छात्र के लिए बारहवीं में भौतिकी, गणित, और रसायनशास्त्र पढ़ा होना जरूरी है तभी उसे दाखिला दिया जाता है। अगर किसी ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की है, तो उससे भी दाखिले का रास्ता खुलता है।
कोर्स कराने वाले संस्थान

1. दिल्ली विश्वविद्यालय, हंसराज कॉलेज
2. आईआईटी, खड़गपुर और रुड़की
3. पाण्डिचेरी यूनिवर्सिटी, पुडुचेरी
4. इण्डियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
5. सेण्ट्रल यूनिवर्सिटी, हरियाणा, महेन्द्रगढ़
वेतन

इस कोर्स के छात्रों के रिसर्च संस्थान 35 से लेकर 40 हजार तक के पैकेज पर हायर करते हैं। निजी क्षेत्रों में युवाओं की सैलरी स्किल को देखते हुए तय की जाती है। जियोलॉजिस्ट का वेतनमान भी 40 हजार रुपए से 50 हजार रुपए हैं। कॉलेज शिक्षण और रिसर्च एसोसिएट के रूप में वेतनमान शुरुआती तौर पर 50 से 60 हजार रुपए हैं।

Job मार्गदर्शन :- फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट में कैरियर। कैसे और कहाँ से करे तैयारी।


       फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट में कैरियरआमतौर पर यह समझा जाता है कि मेडिसिन की दुनिया डॉक्टरों, मरीजों के इलाज और दवाएं देने तक ही सीमित है लेकिन नहीं। मेडिसिन यानी फार्मास्युटिकल का क्षेत्र आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ती इंडस्ट्री में से एक है। यही कारण है कि आज इसमें दवाओं के वितरण, मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस, फार्मा मैनेजमेंट आदि में स्किल्ड लोगों की मांग में काफी तेजी आ गई है। भारत जैसी विशाल आबादी और बेरोजगारी वाले देश में यह क्षेत्र भी जॉब की दृष्टि से संभावनाओं से भरा हुआ है। यदि आपने बीएससी, बीफार्मा या डीफार्मा करके फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट में डिप्लोमा कर लिया, तो फिर राष्ट्रीय/बहुराष्ट्रीय कंपनियों में विभिन्न पदों पर नौकरियां बाहें पसारे खड़ी है। खास बात तो यह है कि इस फील्ड में आकर्षक वेतन भी मिल रहा है और प्रोग्रेस की संभावनाएं भी भरपूर हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा मार्केटिंग, लखनऊ के निदेशक प्रो. ऋषि मोहन कहते हैं कि सामान्य उत्पादों की मार्केटिंग के लिए जहां सीधे डीलर या कस्टमर से संपर्क करना होता है, वहीं दवाओं की मार्केटिंग में डॉक्टर एक अहम कड़ी होता है। सबसे पहले दवा की खूबियों के बारे में डाक्टरों को संतुष्ट करना जरूरी होता है, तभी वे इसे अपने मरीजों के प्रिस्क्रिप्शन में लिखते हैं। इसके अलावा डाक्टरों से संपर्क तथा दुकानों में दवा की उपलब्धता के बीच भी सामंजस्य बना कर चलना होता है। फार्मा मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करने के लिए मैनेजमेंट के साथ दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों एवं तकनीक का भी ज्ञान होना चाहिए। पहले दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों के विपणन के क्षेत्र में किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं समझी जाती थी। कोई भी विज्ञान स्नातक इस काम के लिए नियुक्त कर लिया जाता था। लेकिन मल्टीनेशनल कंपनियों के आने के बाद प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण आज दवा कंपनियां मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव अथवा मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में प्रशिक्षित लोगों को ही रखना चाहती हैं। इसी जरूरत को देखते हुए फार्मा मार्केटिंग कोर्स की शुरुआत की गई है।
फार्मा इंडस्ट्री में बूम

फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी इंडस्ट्री है, जिसमें पिछले कुछ वर्षों से हर साल 8 से 10 प्रतिशत की गति से इजाफा हो रहा है। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग 42 हजार करोड़ रुपए से अधिक का है, जिसमें निर्यात भी शामिल है। भारत में फार्मास्युटिकल का विशाल बाजार देखते हुए विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियां इसमें काफी रुचि दिखा रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस समय भारत के मेडिसिन मार्केट के 75 प्रतिशत पर भारतीय कंपनियों का ही कब्जा है, जबकि शेष मात्र 25 प्रतिशत ही एमएनसीज के हाथ में हैं। वर्ष 2005 में देश की फार्मा इंडस्ट्री का कुल प्रोडक्शन करीब 8 बिलियन डॉलर का था, जिसके 2010 तक 25 बिलियन डॉलर हो जाने की उम्मीद है। भारत में इस समय 23 हजार से भी अधिक रजिस्टर्ड फार्मास्युटिकल कंपनियां हैं, हालांकि इनमें से करीब 300 ही आर्गेनाइज्ड सेक्टर में हैं। एक अनुमान के अनुसार इस इंडस्ट्री में तकरीबन दो लाख लोगों को काम मिला हुआ है। फार्मा इंडस्ट्री की वर्तमान प्रगति को देखते हुए अगले कुछ वर्षों में इस इंडस्ट्री को दो से तीन गुना स्किल्ड लोगों की जरूरत होगी। भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स की अपार संभावना को देखते हुए मल्टीनेशनल कंपनियां यहां शोध व विकास गतिविधियों के लिए भारी निवेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए आर एंड डी (शोध व विकास) पर वर्ष 2000 में जहां महज 320 करोड़ रुपए खर्च किए गए, वहीं 2005 में यह बढ़कर 1,500 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस संबंध में इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल दिलीप शाह का कहना है कि, भारी मात्रा में निवेश को देखते हुए स्वाभाविक रूप से फार्मा रिसर्च के लिए प्रति वर्ष एक हजार और साइंटिस्टों की जरूरत होगी। इस स्थिति को देखते हुए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर विभिन्न संस्थानों द्वारा अनेक उपयोगी कोर्स चलाए जा रहे हैं।
कार्य और पद

मल्टीनेशनल कंपनियों के इस क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद दक्ष लोगों की मांग में काफी तेजी आई है। पहले दवाओं व चिकित्सा उपकरणों के विपणन के लिए अनट्रेंड लोग भी रख लिए जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कंपनियां मार्केटिंग से लेकर टेक्निकल काम तक के लिए वेल-एजुकेटेड व ट्रेंड लोगों को ही प्राथमिकता दे रही हैं-चाहे वह आर एंड डी हो, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हो, मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव हो या फिर कोई और पद।
उपलब्ध कोर्स

भारत में पहले फार्मास्युटिकल की पढ़ाई गिने-चुने संस्थानों में ही होती थी, लेकिन तेजी से बढ़ते बाजार और ट्रेंड लोगों की मांग को पूरा करने के लिए अब कई संस्थानों में ऐसे कोर्सो की शुरुआत हो गई है। आज देश में 100 से अधिक संस्थानों में फार्मेसी में डिग्री कोर्स और 200 से अधिक संस्थानों में डिप्लोमा कोर्स चलाए जा रहे हैं। बारहवीं के बाद सीधे डिप्लोमा किया जा सकता है। कुछ कॉलेजों में फार्मेसी में फुलटाइम कोर्स संचालित हैं। फार्मा रिसर्च में स्पेशलाइजेशन के लिए एनआईपीईआर यानी नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा एजुकेशन एंड रिसर्च जैसे संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं। दिल्ली स्थित एपिक इंस्टीटयूट द्वारा फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स चलाया जा रहा है। इसमें बीएससी (केमिस्ट्री या बायोलॉजी के साथ), बीफार्मा या डीफार्मा कर चुके अभ्यर्थी प्रवेश के पात्र हैं। इस कोर्स के दो सत्रों में से पहले में फार्मास्युटिकल एवं मैनेजमेंट के विभिन्न पहलुओं का ज्ञान कराया जाता है, जबकि दूसरे सत्र में स्पेशलाइजेशन के तीन विषयों-फार्मास्युटिकल सेल्स एंड मार्केटिंग मैनेजमेंट, फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट मैनेजमेंट तथा फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन मैनेजमेंट में से किन्हीं दो विषयों का चयन करना होता है। इस कोर्स के तहत स्टूडेंट को मल्टी स्किलिंग ट्रेनिंग दी जाती है। कुछ विश्वविद्यालयों द्वारा फार्मा मैनेजमेंट में एमबीए पाठयक्रमों की शुरुआत की गई है। इसकी अवधि दो वर्ष है तथा इसमें प्रवेश के लिए अभ्यर्थी को किसी भी स्ट्रीम से स्नातक होना चाहिए। एमबीए रेगुलर तथा पत्राचार दोनों तरीके से किया जा सकता है। जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली में मार्केटिंग में विशेषज्ञता के साथ एमफार्मा कोर्स भी उपलब्ध है। कुछ जगहों पर बीबीए (फार्मा मैनेजमेंट) कोर्स भी चलाया जा रहा है। यह तीन वर्षीय स्नातक कोर्स है, जिसमें छात्र 10+2 के बाद प्रवेश ले सकते हैं।

इसके साथ-साथ पीजी डिप्लोमा इन फार्मास्युटिकल एवं हेल्थ केयर मार्केटिंग, डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग, एडवांस डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग एवं पीजी डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग जैसे कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठयक्रमों की अवधि छह माह से एक वर्ष के बीच है। इन पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम योग्यता बीएससी, बीफार्मा अथवा डीफार्मा निर्धारित की गई है।
विषय की प्रकृति

फार्मा मैनेजमेंट पाठयक्रम में इसके अंतर्गत फार्मा सेलिंग, मेडिकल डिवाइस मार्केटिंग, फार्मा ड्यूरेशन मैनेजमेंट, फार्मा मार्केटिंग कम्युनिकेशन, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजमेंट, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट, फर्मास्युटिक्स, एनाटॉमी एवं मनोविज्ञान, प्रोडक्शन प्लानिंग, फार्माकोलॉजी इत्यादि विषय पढ़ाए जाते हैं। इन तकनीकी विषयों के अलावा व्यक्तित्व ड्रग डेवलपमेंट और कंप्यूटर की व्यावहारिक जानकारी भी दी जाती है।
जॉब संभावनाएं

दिल्ली स्थित एपिक इंस्टीटयूट ऑफ हेल्थ केयर स्टडीज के डायरेक्टर दीपक कुंवर का कहना है कि यह क्षेत्र आज सर्वाधिक संभावनाओं से भरा है। इसमें दक्ष युवा देशी-विदेशी कंपनियों में कई तरह के आकर्षक काम आसानी से पा सकते हैं, जैसे-बिजनेस एक्जीक्यूटिव व ऑफिसर, प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव आदि। दो से तीन वर्ष के अनुभव और मेहनत व लगन से काम करने के बाद एरिया मैनेजर, रीजनल मैनेजर, प्रोडक्ट डेवलपर के रूप में प्रॅमोशन पाया जा सकता है। दीपक का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र में दक्ष लोगों की लगातार जरूरत को देखते हुए अधिकांश छात्रों को फार्मास्युटिकल कंपनियां कोर्स के दौरान ही आकर्षक वेतन पर नियुक्त कर लेती हैं। ऐसी कंपनियों में रेनबैक्सी, सिप्ला, ग्लैक्सो, कैडिला, डॉ. रेड्डीज, टॉरेंट, निकोलस पीरामल, पीफाइजर, जॉन्सन एंड जॉन्सन, आईपीसीए, पैनासिया बॉयोटेक आदि प्रमुख हैं। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा मार्केटिंग, लखनऊ के प्रोफेसर ऋषि मोहन का कहना है कि इस क्षेत्र में प्लेसमेंट की स्थिति बहुत अच्छी है। प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा संस्थानों में सीधी नियुक्ति के लिए कैंपस इंटरव्यू भी आयोजित किए जाते हैं।
कमाई

प्रशिक्षित लोगों की मांग देखते हुए इस क्षेत्र में वेतन भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। रिसर्च और एंट्री लेवॅल पर सैलॅरी डेढ़ लाख रुपए वार्षिक मिलती है, जो 20 लाख प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है। औषधि उत्पाद के क्षेत्र में भी यही स्थिति है। मार्केटिंग क्षेत्र में एक फ्रेशर को तीन-साढ़े तीन लाख वार्षिक मिल जाता है। दीपक कुंवर बताते हैं कि उनके यहां के स्टूडेंट्स को आरंभिक वेतन के रूप में 8 से 15 हजार रुपए तक आसानी से मिल जाता है।
प्रमुख संस्थान

एपिक इंस्टीटयूट ऑफ हेल्थ केयर स्टडीज डी-62 (प्रथम तल), साउथ एक्सटेंशन, पार्ट-1, नई दिल्ली-49, फोन : 011-24649994, 24649965
वेबसाइट : www.apicworld.com

इंस्टीटयूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, 15, आइडियल चेंबर, आइडियल कॉलोनी, प्लॉट न.-8, सीटीएस न.-831, पूना,
ई-मेल : iper@pn4.vsnl.net.in

नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन, मोहाली, चंडीगढ-62 इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा मार्केटिंग 5/28, विकास नगर, लखनऊ, उ. प्र.
ई-मेल : iict@satyam.net.in

एसपी जैन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, मुंशी नगर, दादाभाई रोड, अंधेरी वेस्ट मुंबई,
ई-मेल : spjicom@spjimr.ernet.in

नरसी मुंजे इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज जेवीपीडी स्कीम, विले पार्ले, मुंबई-56
ई-मेल : enquiry@nmims.edu

जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च, बंगलूरू,
वेबसाइट : www.jncasr.ac.in
फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री पर एक नजर

फार्मा बिजनेस या दवा व्यवसाय आज विश्व के चौथे बड़े उद्योगों में से एक है।
विश्व व्यापार का 8 प्रतिशत हिस्सा इस उद्योग के अंतर्गत आता है।
वर्तमान में इस उद्योग का कुल कारोबार 10 बिलियन डॉलर है।
भारत का घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग 42 हजार करोड़ रुपए से अधिक का है।
इसमें 8-10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हो रही है।
वर्ष 2010 तक इसके 25 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
फार्मा मार्केटिंग के क्षेत्र में एक फ्रेशर को तीन से साढ़े तीन लाख रुपए का पैकेज मिल जाता है।

Job कैरियर हेल्प:- संयुक्त राष्ट्र संघ में कॅरिअर के विकल्प। कैसे और कहा से करे तयारी।


      संयुक्त राष्ट्र संघ (यू एन ओ) एक अंतरराष्ट्रीय संघ है, जिसकी स्थापना 1945 में की गई थी। इसका मुख्यालय न्यूयार्क (अमरीका) में है। इसके मुख्य घटक निम्नलिखित हैं :- जनरल असेंबली, सुरक्षा परिषद, सचिवालय एवं आर्थिक तथा सामाजिक परिषद, यू.एन.ओ के मुख्य लक्ष्य हैं – अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास करना, आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति, बेहतर जीवन-स्तर तथा मानव अधिकारों को बढ़ावा देना। इस समय 193 देश इसके सदस्य हैं। इसके सचिवालय कार्यालय न्यूयार्क, जेनेवा, नैरोबी, तथा विएना में स्थित हैं, इसके अधीन कई महत्वपूर्ण संगठन जैसे यूनेस्को, यूनीसेफ, यू.एन.डी.पी., डब्ल्यूटी, ओ, यू एन.एच.सी.आर.डब्ल्यू.एच.ओ., आई. सी.जे, विश्व बैंक आदि कार्यरत हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदायों की सहायता कर रहे हैं।

सितंबर, 2000 में, विश्व के नेता न्यूयार्क स्थित संघ के मुख्यालय में एकत्र हुए और संयुक्त राष्ट्र की सहस्राब्दि घोषणा-नितांत निर्धनता को कम करने के लिए एक नई सार्वभौमिक सहभागिता के प्रति राष्ट्रों की वचनबद्धता पारित की, जिसमें 2015 के निर्धारित समय तक कई समयबद्ध लक्ष्य भी रखे गए – जो सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (एम. डी.जी) के रूप में प्रसिद्ध हैं।
ये आठ लक्ष्य निम्नलिखित हैं :-

1. नितांत निर्धनता उन्मूलन
2. सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा
3. लिंग समानता तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना
4. शिशु-मृत्यु दर घटाना
5. मातृ स्वास्थ्य में सुधार लाना
6. एच.आई.वी. तथा एड्स, मलेरिया एवं अन्य रोगों का सामना करना।
7. पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करना।
8. विकास के लिए एक व्यापक सहभागिता बढ़ाना

आठों एम.डी.जी. योजना पर सभी देश तथा विश्व की प्रमुख विकास संस्थाएं सहमत हैं, उन्होंने विश्व के सबसे निर्धन एवं अत्यधिक सीमांत व्यक्तियों की आवश्यकता को पूरा करने के प्रेरक तथा अभूतपूर्व प्रयास किए हैं। संयुक्त राष्ट्र न तो विश्व शासक है और न ही यह कानून बनाता है। तथापि, यह अंतरराष्ट्रीय संघर्ष/विवादों को सुलझाने में सहायता करता है और हम सभी को प्रभावित करने वाले मामलों पर नीति निर्धारित करता है। संयुक्त राष्ट्र में सभी राष्ट्र – बड़े एवं छोटे, धनी या निर्धन, भिन्न राजनीतिक विचारों तथा सामाजिक व्यवस्था रखने वाले हों, इस प्रक्रिया में एक-ध्वनि तथा एकमत रखते हैं, अरबी, चीनी, फ्रैंच, अंग्रेजी, रूसी तथा स्पेनिश भाषाएं संयुक्त राष्ट्र की 6 राज-भाषाएं हैं। महासचिव संयुक्त राष्ट्र संघ सचिवालय के कार्यपालक प्रमुख हैं।
यू.एन.ओ. में कॅरिअर के विकल्प

यू.एन.ओ., अपनी अंतरराष्ट्रीय सिविल सेवा में विभिन्न संवर्गों में अपने सभी सदस्य राष्ट्रों से कर्मचारियों तथा व्यवसायियों की एक खुली तथा पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती करता है। इनमें से कुछ श्रेणियां निम्नलिखित हैं :-

युवा व्यवसायी कार्यक्रम (वाई.पी.पी.)
भाषा प्रतियोगी परीक्षाएं
एसोशिएट विशेषज्ञ कार्यक्रम
कर्मचारी वर्ग
स्वयं सेवी कार्यक्रम
इंटर्नशिप कार्यक्रम
अस्थायी रोजगार
यू.एन. सिविल सेवा – युवा व्यवसायी कार्यक्रम (वाई.पी.पी.)

युवा व्यवसायी कार्यक्रम, भारत के व्यावसायिक रूप से योग्य युवाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक, लाभप्रद तथा आकर्षक है, क्योंकि यह कार्यक्रम उन्हें प्रतिष्ठित स.रा. सिविल सेवा में कार्य करने का अवसर देता है। विदेश मंत्रालय (भारत सरकार) तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग में संयुक्त राष्ट्र युवा व्यवसायी कार्यक्रम (वाई.पी.पी.)- यूएन सिविल सेवा परीक्षा – 2012 नामक एक भर्ती पहल संचालित कर रहा है, जो एक वार्षिक खुली, पारदर्शी, प्रवेश परीक्षा के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र (यू एन ओ) में नई प्रतिभा देगी। यह परीक्षा कई वर्षों बाद भारतीय नागरिकों के लिए पहली बार खुली है उच्च योग्यता रखने वाले युवा व्यवसायों के लिए यह कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र में अपना कॅरिअर प्रारंभ करने के लिए एक प्लेटफार्म है।

इसके लिए पात्रता अपेक्षाएं इस प्रकार हैं :-
अधिकतम आयु 32 वर्ष या कम आयु के हों।

रोजगार से जुड़े किसी विषय में विश्वविद्यालय की स्नातक या मास्टर डिग्री (नीचे उल्लेखित शैक्षिक पृष्ठभूमि देखें) अंग्रेजी या फ्रैंच में धाराप्रवाह हो।

इस वर्ष यह परीक्षा वास्तुकला, आर्थिक कार्य, सूचना प्रणाली तथा प्रौद्योगिकी, राजनीतिक मामलों, रेडियो निर्माता (किश वाहिली, पुर्तगीज) तथा सामाजिक मामलों में शैक्षिक पृष्ठभूमि रखने वाले उम्मीदवारों के लिए होगी।

उम्मीदवार केवल एक वर्ग के लिए आवेदन कर सकता है (एक से अधिक वर्गों के लिए भेजे गए आवेदन पत्र रद्द कर दिए जाएंगे)। महिलाओं को भी आवेदन करने के लिए अत्यधिक प्रोत्साहित किया जाता है।
यू एन सिविल सेवा युवा व्यवसायियों में क्या तलाशती है?

सत्यनिष्ठा

हमेशा निःस्वार्थ, निष्पक्ष तथा ईमानदारी के साथ कार्य करना ही सत्यनिष्ठा है। जब युवा व्यवसायी संयुक्त राष्ट्र में कार्य करता है तो उसका अर्थ है कि संघ की गरिमा को अपने दैनिक कार्यकलापों और आचरण में उतारना। सत्यनिष्ठा कर्मचारियों के व्यवसायवाद को बनाए रखती है; यह दक्षता का आधार है।
व्यावसायिकता

व्यावसायिकता के साथ कार्य करने के लिए कार्यसमर्पित, कर्तव्यनिष्ठ होना तथा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने एवं परिणाम प्राप्त करने के लिए कुशल होना अपेक्षित है। इसका अर्थ है अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में सक्षमता प्रदर्शित करना और किसी भी स्थिति में अपने कार्य में श्रेष्ठ संभावित उपस्थिति, वचनबद्धता तथा उत्कृष्टता प्रदर्शित करना।
विविधता के प्रति सम्मान

विविधता संयुक्त राष्ट्र की एक निर्धारक विशेषता है और संघ स्वीकार करता है कि इसके स्टाफ की विविधता इसके जटिल कार्यों को करने का एक गुण है। वाई.पी.पी. को एक दूसरे की विशिष्टता को सम्मान देने तथा आम चुनौतियों का समाधान करने के लिए और अच्छे तथा रचनात्मक उपाय तलाशने के लिए उन पर विश्वास करने के लिए प्रेरित किया जाता है। सार्वभौमिक सोच रखना किंतु स्थानिक कार्य करना सही समाधान ढूंढने का समान्यतः एक सही मंत्र है।

इसके अतिरिक्त, यू.एन., सिविल सेवा भर्ती प्रक्रिया बुनियादी क्षेत्रों जैसे नवप्रवर्तन, मौलिकता, निरंतर सीखने के प्रति वचनबद्धता, एकजुटता, ग्राहक ध्यान, संचार में उत्कृष्टता, नियोजन एवं संयोजन, मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के प्रति वचनबद्धता, प्रौद्योगिकी ज्ञान, नेतृत्व तथा अन्यों को सशक्त करने के लिए प्रेरित करना आदि में उम्मीदवारों की सूक्ष्म सक्षमता का गंभीरता से मूल्यांकन करती है।
कॅरिअर-पथ

वाई.पी.पी. को प्रारंभ में दो वर्षों के लिए नियुक्त किया जाएगा और उके बाद नियमित नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा। संघ कार्य-केंद्रों में तथा कार्य-क्षेत्रों में परिवर्तन को बढ़ावा देता है। एक नए भर्ती वाई.पी.पी के रूप में उसने, उनकी सेवा के प्रारंभिक पांच वर्षों में कम से कम दो भिन्न कार्यों तथा कार्य-केंद्रों पर कार्य करने की प्रत्याशा की जाती है। इन्हें ओरिएंटेशन तथा मोबिलिटी प्रशिक्षण तथा कॅरिअर समर्थन दिया जाएगा। इससे उन्हें सीखने की अवधि को अनुकूल बनाने एवं तीव्रता लाने और अंतरराष्ट्रीय सिविल कर्मचारी के रूप में उत्पादनशील कार्य करने तथा कार्य-संतुष्टि प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

संयुक्त राष्ट्र में कॅरिअर के कुछ स्पष्ट निर्धारित मार्ग हैं। व्यवसाय की विविधता तथा बहुविषयक जनादेश का अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति न केवल कार्य, विभाग ही बदल सकता है, बल्कि संगठन या कार्य-क्षेत्र भी बदल सकता है, यद्यपि ऐसे परिवर्तन में अध्ययन, समय एवं प्रयास आवश्यक होते हैं। साथ ही उन्हें महत्वपूर्ण अनुभव, व्यापक संकल्पना तथा चुनौती-पूर्ण कार्य भी दिए जाते हैं।

अन्य भू-भाग में स्थानांतरण एक अन्य तथ्य है जो संयुक्त राष्ट्र में कॅरिअर को सकारात्मक रूप में प्रभावित करता है। वरिष्ठ पदों पर कॅरिअर की प्रगति विभिन्न स्थानों पर सेवा सहित स्थानांतरण के प्रमाण पर निर्भर करती है।

कॅरिअर-पथ व्यावसायिक विकास के बारे में आकांक्षा तथा निर्णयों का प्रतिबिम्ब है। संघ, किसी भी व्यक्ति के कॅरिअर निर्णय को प्रोत्साहन तथा समर्थन देने के लिए प्रभावी व्यवस्था द्वारा एक समर्थक भूमिका निभाता है। स्टाफ की तैनाती तथा स्थानांतरण आवश्यकतानुसार सदस्य राष्ट्रों में यू.एन. कार्यालयों में कहीं भी या यू.एन. मुख्यालय में की जा सकती है। वाई.पी.पी. का वार्षिक कुल वेतन 37,000 से 80,000 अमरीकी डॉलर होता है (राष्ट्रीय सरकार यू.एन.के कर्मचारियों से सामान्यतः कोई कर नहीं लेती है)। अतिरिक्त भत्ते नियमानुसार देय होते हैं।
परीक्षा- प्रक्रिया

लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार प्रक्रिया का आयोजन संयुक्त राष्ट्र कॅरिअर वेबसाइट पर दिए गए विवरण के अनुसार किया जाता है। सामान्य मामलों (निबंध लेखन सहित) पर प्रश्न-पत्र तथा ऐच्छिक शैक्षिक विषयों के प्रश्न-पत्र लिखित परीक्षा के भाग होते हैं।

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी व्यवसायी (जिनकी विश्व में अत्यधिक मांग है) इस कॅरिअर को एक अत्यधिक नए एवं आकर्षक रूप में स्वीकार कर सकते हैं। विभिन्न शैक्षिक पृष्ठभूमि के आवेदक अपने विषय के नमूना प्रश्न-पत्र, सामान्य मामलों के नमूना प्रश्न-पत्र तथा अन्य सभी आवश्यक विवरण यू.एन. की वेबसाइट http://careers.un.org/ypp पर देख सकते हैं। यू.एन.ओ. के अन्य भर्ती कार्यक्रमों के विवरण यू.एन.ओ. की अधिकारिक वेबसाइट के कॅरिअर सेक्शन में देख सकते हैं।

Job कैरियर हेल्प:- कैसे करें IBPS Special Officer बनने की तैयारी ?


कया है  IBPS Special Officer

यह परीक्षा IBPS द्वारा आयोजित की जाती है। जिसमें विशेष अफसरों यानी Specilist Officers को नियुक्त किया जाता है। ये Specilist Officers  दस अलग-अलग विभागों के लिए चयनित किए जाते हैं, जिसमें से Information Technology  भी एक है। There are two Specialist IT Officer cadre posts: Specialist IT Officer – Scale I and Specialist IT Officer – Scale II.

Elegibility Criteria :

उन बैंकों की सूची जो IBPS Special Officer परीक्षा में भाग लेते हैं :

Depending on the vacancies, the selected candidates will be allotted postings to Allahabad Bank, Central Bank of India, Indian Bank, Syndicate Bank , Andhra Bank, Corporation Bank, Indian Overseas Bank, UCO Bank, Bank of Baroda, Dena Bank, Oriental Bank of Commerce, Union Bank of India, Bank of India, Punjab National Bank, United Bank of India, Bank of Maharashtra, IDBI Bank, Punjab & Sind Bank, Vijaya Bank, Canara Bank.

Papper Pattern:

सामान्या लिखित परीक्षा 120  मिनट की होती है और इसमें नीचे दिए गए विषय आते है:-

सभी प्रश्न एक अंक के होते हैं और पूरी परीक्षा की अवधि-अवधि दो घंटे है इस परीक्षा में negative marking भी की जाती है जो कि हर गलत उत्तर के लिए -0.25 अंक की होती है।

Specilist Officer  की सामान्य परीक्षा की तैयारी कैसे करें  (Preparation Tips):

1.Reasoning:-   Reasoning में नीचे दिए गए विषयों में सक्षम होने के लिए प्रार्थियों को अपने logical skills  यानी तर्क करने का कौशल बेहतर करना चाहिए। साथ ही mental alertmess यानी मानसिक चौकसी बहुत जरूरी है। इन दोनों कुशलताओं को अभ्यास के साथ निखारा जा सकता है। practice test papper and modal test papper भी काफी सहायक होते हैं।

2.English:-  English एक ऐसा विषय है जिसकी तैयारी किसी भी (banking) परीक्षा के लिए बहुत जरूरी है। यह सबसे ज्यादा अंक पाने वाला विषय माना जाता है और इसकी तैयारी करने के लिए परीक्षार्थी को लगातार English newspapper और magzine पढऩी चाहिए, प्रतिदिन English news  देखनी चाहिए और English  के नए शब्द उनके सामानआर्थन और विपरीतार्थक शब्दों के साथ सीखने चाहिए। अपने व्याकरण को मजबूत करने के लिए online  व्याकरण के पेपर हल करें।

3.Quantitative Apptitude:-  नीचे दिए गए विषयों के प्रश्न इस भाव में पूछे जाते हैं। इन विषयों की तैयारी करने के लिए आपको शुरूआत बिलकुल जड़ों से करनी है यानी पांचवीं और छठीं कक्षा के गणित से शुरूआत करनी है।आप अपने समय नियोजन का पूरा ध्यान केंद्रित आप निर्धारित समय में दिए गए प्रश्नों का उत्तर कर सकें।

4. Professional Knowledge:-इस भाग में आपकी special field  से प्रश्न पूछे जाएंगे जैसे कि अगर आप आईटी (IT)से हैं तो आपको आईटी (IT)के प्रश्नों का उत्तर आना चाहिए। अपने विषयों का पूर्ण ज्ञान हासिल करें। आप अपनी विषयों किताबों को पूरी तरह पढ़ सकते हैं और ठोस तैयारी की जा सकती है।

5. Interview Preparation:- साक्षात्कार कुल मिलाकर 100 अंकों का होता है। इसे उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक चाहिए। आमतौर पर सामान्य लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में 80.20 की भागीदारी होती है। अंत में दोनों को मिलाकर आपके निर्धारित अंक तय किए जाते हैं। यह ध्यान में रखा जाए कि जो प्रार्थी सामान्य लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों में उत्तीर्ण होगा वही Special Officer Post  के लिए आगे जाएगा इसलिए IBPS Special Officer Post  की तैयारी सूझबूझ के साथ करें।